इस्तेमाल करो और फेंक दो, यही है तीन तलाक

Currently reading: इस्तेमाल करो और फेंक दो, यही है तीन तलाक
Chitra Tripathi
Chitra Tripathi is Associated with ABP News Channel as a Senior News Anchor
         हिना जिसके नाम में ही वो रंग है, जो हथेलियों पर जब चढ़ती है तो उसकी खूबसूरती देखते ही बनती है , लेकिन वही हिना जब तीन तलाक की भट्टी पर जलती है तो उसका रंग बदरंग हो जाता है। ऐसी ही कहानी है दिल्ली के महरौली में इस्लाम कॉलोनी की रहने वाली हीना की जिसके पति ने इसी हफ्ते की 17 तारीख को उसे तलाक दे दिया। 17-04-2017 को मौलाना की मौजूदगी में उसके पति ने पंचायत बुलाकर अट्ठारह साल के रिश्ते को चंद सेकेण्ड में खत्म कर दिया। हीना के दो बेटे हैं और उसकी शादी उन्नीस सौ अन्ठान्बे में हुई थी। चार साल पहले हीना के पति ने उसे बिना बताये दूसरी शादी कर ली, दूसरी पत्नी को अलग घर में रखता और हीना को दूसरे घर में । हीना दोनों बेटों के साथ महरौली के इस्लाम कॉलोनी में एक बहुत छोटे से कमरे में रह रही है वो भी उस परिवार के मकान मालिक ने तरस खाकर कुछ दिनों का सहारा दे रखा है। पति ने तलाक के वक्त जोर जबरदस्ती कर कागज पर हीना के दस्तखत भी ले लिये। और उसे बीस हजार रुपये देकर छ महीने में दो लाख रुपये देने का वादा कर तलाकनामा लिखा लिया।
   जब हीना अपनी मां के साथ वापस घर लौट रही थीं उस समय वो बीस हजार रुपये भी उससे छीन लिये गये और धमकी दी गई कि अगर बच्चों की सलामती चाहती हो तो यहां से चली जाओ। हीना अपने बच्चों के साथ दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। बेबस होकर दूसरों के सहारे रहने को मजबूर है। पुरुषों के बनाये तीन तलाक ने औरतों को लाचार बना दिया है। इस्तेमाल करो और फेंक दो की सोच ने औरतों के लिये मानों सारे दरवाजे बंद कर दिये हैं। सबसे ज्यादा हैरानी तो तब होती है जब मौलाना इसके पीछे कुतर्क करते हैं। और तीन तलाक को जायज बताने के पीछे नई-नई कहानी गढ़ते हैं। क्या सभ्य समाज इस बात की इजाजत देता है कि तीन तलाक के बाद अगर मियां-बीवी चाहें दोबारा से साथ रहना तो बीवी को हलाला की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। यानि की एक रात के लिये किसी की पत्नी बनना और अगले ही दिन किसी और की हो जाना। फिलहाल हीना के लिये तो सारे दरवाजे बंद हैं, हीना की कहानी तो इस बड़े अंधेरे की एक बहुत छोटी कड़ी है। वक्त ने और मौजूदा दौर की मजबूत सरकार ने इनके अंदर एक भरोसा पैदा किया है कि बस अब और नहीं। मोदी सरकार इन्हें इनका हक दिलाये इसी उम्मीद के साथ आंसूओं को समेटे ये टकटकी लगाकर नरेन्द्र मोदी का चेहरा देख रही हैं। 
नोट - यह लेखिका के निजी विचार है.


By- Chitra Tripathi , Journalist